“मेरे अंदर से इतनी सारी दुआएं सर के लिए हैं कि सर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं… अब तो लगता ही नहीं है कि कोई पेन है, कुछ भी है।” इन शब्दों में झलकती है एक मरीज की राहत, विश्वास और सम्मान। बिहार से आए इस युवक को 2018 से वेरिकोसील (Varicocele) की समस्या थी, जो समय के साथ ग्रेड 4 तक पहुंच गई थी। दर्द इतना तेज़ हो चुका था कि हाथों में कंपन तक महसूस होने लगा था।
स्थानीय डॉक्टरों के गलत इलाज से मामला बिगड़ गया, लेकिन 2023 में Dr. Vijayant Govinda Gupta की यूट्यूब वीडियो से उन्होंने नई आशा पाई। सर्जरी के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और यही संदेश देना चाहते हैं:
“अगर आप वेरिकोसील से परेशान हैं, तो माइक्रोसर्जरी ही चुनिए!”
वेरिकोसील क्या है?
वेरिकोसील एक साइलेंट किलर है। यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे बिना किसी लक्षण के पुरुषों की प्रजनन क्षमता (fertility) को खत्म कर देती है।
वेरिकोसील में, टेस्टिस (अंडकोष) की नसें फूल जाती हैं और उनका वॉल्व खराब हो जाता है, जिससे “गंदा खून” यानी टॉक्सिक ब्लड टेस्टिस में जमा रहता है। इसका परिणाम:
- टेस्टिस का छोटा होना
- टेस्टोस्टेरोन का गिरना
- स्पर्म काउंट में गिरावट
- सेक्सुअल डिसफंक्शन
- भविष्य में पिता बनने की क्षमता का खत्म हो जाना
वेरिकोसील के लक्षण
हालांकि वेरिकोसील के लक्षण हर किसी में नहीं दिखते, लेकिन कुछ आम संकेत हो सकते हैं:
- अंडकोष में हल्की सूजन या झूलने का अनुभव
- हल्का से मध्यम दर्द या डिस्कंफर्ट
- एक तरफ का टेस्टिस छोटा लगना
- लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ना
याद रखें: ये लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कई बार वर्षों तक नजर नहीं आते।
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वेरिकोसील क्यों खतरनाक है?
यह जानलेवा नहीं है, लेकिन जीवन की गुणवत्ता और प्रजनन क्षमता को चुपचाप बर्बाद कर देता है। Indian Army और सरकारी सेवाओं में भर्ती से पहले वेरिकोसील की जांच अनिवार्य होती है, ताकि भविष्य में समस्या न हो।
वेरिकोसील का इलाज: दवाइयों से सर्जरी तक
1. लो ग्रेड वेरिकोसील का इलाज
यदि वेरिकोसील का ग्रेड कम है, तो डॉक्टर की सलाह से:
- उचित दवाइयां
- एक्सरसाइज
- डायटरी प्रीकॉशन्स
2. हाई ग्रेड वेरिकोसील का इलाज: माइक्रोसर्जरी ही सर्वोत्तम विकल्प
जब वेरिकोसील ग्रेड 3 या 4 तक पहुंच जाए, और टेस्टिस का आकार, हार्मोन लेवल, या स्पर्म काउंट प्रभावित हो, तब केवल सर्जरी ही उपाय है।
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माइक्रोसर्जरी बनाम एंबोलाइजेशन
माइक्रोसर्जरी | एंबोलाइजेशन |
95% सक्सेस रेट | कम सक्सेस रेट |
टारगेटेड नसों को हटाया जाता है | सभी नसें कवर नहीं होतीं |
रेडिएशन फ्री | रेडिएशन का उपयोग |
गुबरनिकुलर नसों को भी ट्रीट करता है | इन नसों को छोड़ देता है |
लॉन्ग टर्म बेनिफिट | बार-बार रीकरेन्स की संभावना |
Dr. Vijayant Govinda Gupta का मानना है:
“माइक्रोसर्जरी ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त और सुरक्षित उपाय है।”
मरीज की सफलता की कहानी: प्रेरणा और मार्गदर्शन
बिहार से आए एक मरीज की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर लिया गया निर्णय जीवन बदल सकता है।
उन्होंने कई सालों तक दर्द झेला, गलत सर्जरी का भी शिकार हुए, लेकिन जब उन्होंने Dr. Gupta को चुना, तो उनकी जिंदगी बदल गई। सर्जरी के बाद एक महीने के भीतर वह पूर्णतः स्वस्थ हो चुके थे।
“अब तो लगता ही नहीं कि कोई बीमारी थी भी!”
यदि आप या आपके किसी परिचित को वेरिकोसील की समस्या है:
✅ देर न करें
✅ सही जानकारी लें
✅ माइक्रोसर्जरी पर विचार करें
✅ Dr. Vijayant Govinda Gupta से संपर्क करें